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बेबाक कलम
p>जीवन में असफलता से भी सीखना चाहिए, रियल लाईफ का सुशांत नही बनना

(अनिल सक्सेना/ललकार)

सुशांत सिंह राजपूत , धारावाहिक पवित्र रिश्ता में देखा और एम.एस.धोनी द अनटोल्ड स्टोरी में उसके एक्ट को देखकर प्रभावित हो गया । जब मुझे उसके द्वारा आत्महत्या करने की खबर मिली तो अचम्भित रह गया। खबर सुनकर कुछ देर तक तो प्रतिक्रिया नही दे पाया और उसके कुछ देर बाद उसकी कायरता पर दुख प्रकट करने के सिवाय मेरे पास कुछ नही था । पूरा दिन मेरा खराब रहा और रात को मैं लिखने लगा क्यों कि मेरे पास लिखने के अलावा कुछ भी नही है ।

मैने हमेशा संघर्ष करने वाले को सैल्यूट किया और उसके संघर्ष से सीखने का प्रयास किया क्यों कि मैं स्वयं भी पिता जी के स्वर्गवास होने के बाद 13 साल की उम्र से ही संघर्षरत रहा, जीवन ने बहुत नजदीक से सिखाया और कई बार मुझे एम.एस.धोनी द अनटोल्ड स्टोरी जैसी फिल्मों से संघर्ष करने की ताकत मिली।

कई बार असफलताओं का स्वाद चखकर भी अपने जुनून के कारण आगे बढ़ता रहा । जिस दिन मैं असफल होता , उसके अगले दिन ही पूरी ताकत से फिर नये टास्क पर काम करने लगता। कभी हार नही मानी। समझ नही आता है कि सुशांत सिंह राजपूत जैसे सफल नायक क्यों आत्महत्या जैसा कदम उठाकर अपने प्रशंसकों को दुख पहुचाने का कार्य करते है।

अभी कल ही मैने खबर पढ़ी कि एक व्यक्ति ने अपनी 18 लाख प्रतिवर्ष की नौकरी के चले जाने के एक माह बाद ही परिवार सहित आत्महत्या कर ली । इस सामूहिक आत्महत्या पर कई सवाल उठे लेकिन समझ नही आता है कि बरसों अच्छी नौकरी करने वाला कुछ माह के संकट को नही झेल पाया । सफल होना अच्छी बात है और कम समय में सफलता मिलना और अच्छी बात है लेकिन सफलता और असफलता के साथ में ही चलने का नाम जीवन है इसलिए सफलता की जीत का जश्न मनाने के साथ ही असफलता की हार को भी स्वीकार करना चाहिए ।

सच तो यह है कि कोविड - 19 ने इंसान को सच्चाई से रूबरू करा दिया है । हमें सपनों में नही बल्कि हकीकत में जीना चाहिए , दूसरों की देखा-देखी अपने को कर्जो में नही डुबोना चाहिए । जीवन धरातल मंे जीना चाहिए ना कि चमक-दमक के चलते कर्जो के बीच । मैने कई ऐसे लोगो को देखा है जो अपने पड़ोसी को देखकर बड़ी गाड़ी ले आए लेकिन उसकी किश्त नही दे पाए और कुछ दिनों बाद ही गाड़ी भी उनके हाथों से चली गई। इस महामारी ने देश में बेरोजगारी को बढ़ाया है और लगातार लोग अपनी नौकरी से हाथ धो रहे है लेकिन हमें धैर्य रखकर इस संकट से उबरने का प्रयास करना है। ये ध्यान रखना है कि सरकार आपके लिए कुछ भी नही करेगी , करना आपको ही, अपने लिए है।

जीवन में जीत जुनून से ही मिलती है और कमजोर सिर्फ रोना ही रोता रह जाता है । कभी -कभी कम समय में असाधारण सफलता किस्मत से मिल जाती है लेकिन उस सफलता को बरकरार रखना और असफलता को स्वीकार कर जीत के लिए पागलपन से जूझना ही जीवन है और सुशांत सिंह राजपूत जैसे कायर लोगों को इस बात को समझना ही होगा अन्यथा आत्महत्या के दूसरे दिन भुलाए जाने लगेगे ।

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