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कोरोना ने इंसान को सच का आईना दिखाया, क्या हम सुधरे ? * हिंदुस्तानी है, इतिहास गवाह है हम मुसीबत से घबराते नही है, हरा देते है * राजस्थानी भाषा के संरक्षण में कारगर साबित होगा कैलेंडर- धीरज श्रीवास्तव * मुख्यमंत्री गहलोत ने प्रदेशवासियों से अपील की * भाजपा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ ब्लैक पेपर जारी किया * मैं मौत के मूंह में , लगा इतिहास दोहराया जा रहा है * क्या हमारी भी कोई जिम्मेदारी बनती है ? * अपने और परिवार के बचाव के लिए वैक्सीन लगवाइए, गाइडलाइन की पालना कीजिए * कपासन विधायक प्रत्याशी आनंदी राम खटीक के सुपुत्र विवान चावला की प्रथम पुण्यतिथि पर कपासन विधानसभा क्षेत्र सहित चित्तौड़गढ़,बेगू, बड़ीसादड़ी और निम्बाहेड़ा में भी श्रद्धा सुमन अर्पित कर दी श्रद्धांजलि * कौन डर रहा है वसुंधरा राजे से *
ये वक्त भी गुजर जाएगा , लेकिन याद सब रखा जाएगा
ये वक्त भी गुजर जाएगा , लेकिन याद सब रखा जाएगा

(अनिल सक्सेना/ललकार)

दुनिया एक रंगमंच है और हम सभी को अपना किरदार ईमानदारी से निभाना चाहिए लेकिन सवाल यह है कि क्या हम अपना काम ईमानदारी से कर रहें है ? जीवन और मौत तो भगवान हनुमान के हाथ में है, सोचा नही था कि ऐसा भी वक्त आएगा । जैसे ही कोरोना हुआ, वैसे ही कौन आप ? डरे हुए है, हम सब और इसका लाभ लेने में लगे है कुछ लोग । जो आॅक्सीमीटर चार सौ में आता है, वो आज पंद्रह सौ रूपये में और इससे भी ज्यादा में बेचने में लगे है लोग , यह भी याद रखा जाएगा।

आॅक्सीजन भी ब्लैक में, दवाई भी ब्लैक में और रही सही कसर यह कि सेनेटाइजर और मास्क भी ब्लैक में। निजी चिकित्सालयों ने तो गजब लूट मचा रखी है, कोरोना का इलाज सरकारी और लगे यह लाखों कमाने में। यह तो मेडिकल की बात। यहां तो फल भी डबल दामो में । किराना सामान के दामों में भी बेहताशा बढ़ोत्तरी । आप चिंता नही करें , यह सब याद रखा जाएगा ।

कई लोगों के परिवार के परिवार उजड़ गए , प्रतिदिन बुरी खबर सुनने का मिल रही है । अपना जब जाता है तो कितना दुख होता है, यह तो उस परिवार के सदस्य से ही पूछिए । इस सदी में लचर चिकित्सा व्यवस्था और आॅक्सीजन की कमी से मरना सरकारों के लिए शर्म की बात है । इस सबकी जिम्मेदारी तो तय करनी ही होगी । साहब याद तो यह भी रखा जाएगा ।

हम डरे हुए है और कुछ लोग हमारे डर को कई गुना लाभ का व्यवसाय बना रहें है । त्रिपुरा के तत्कालीन कलक्टर ने तो हमें राजशाही तंत्र की याद दिला दी । राजनेता भीड़ एकत्रित करे तो हिम्मत किसी कलक्टर की नही कि रोक सके लेकिन हम आम आदमी अगर गलती कर दे तो दंड भी गैर कानूनी .........। याद तो यह भी रखा जाएगा ।

क्या चुनाव आयोग को चुनाव कराना आदमी की जिंदगी से भी जरूरी था, कोर्ट की टिप्पणी अच्छी है लेकिन क्या सजा मुकर्रर नही होनी चाहिए ? हिंदुस्तान में कोरोना के कारण बुरी स्थिति सामने है, क्या इसका जिम्मेदार नही खोजना चाहिए ? सबसे पहले तो चिकित्सा व्यवस्था ठीक करना जरूरी है लेकिन यहां भी राजनीति । कौन सुधारेगा इस सबको । लोकतंत्र मतलब जनता द्वारा , जनता के लिए, जनता का शासन लेकिन क्या जनता के इस लोकतंत्र मे जनता की कोई सुनने वाला है ? याद तो यह भी रखा जाएगा।

इस संकटकाल में कई लोग बेहतरीन कार्य कर रहे है । इसमें कोई दो राय नही है कि चिकित्सा जगत भी बहुत अच्छा कार्य कर रहा है, चिकित्साकर्मी अपनी जान जोखिम में डाल कर लोगों की जान बचा रहें है लेकिन क्या यह सच नही है कि कोरोना से भी ज्यादा दूसरी बीमारियों से लोग मर रहें है ? क्या कारण यह है कि चिकित्सक कोरोना का नाम लेकर दूसरी बीमारियों का इलाज ही नही कर रहें है ?

मौत का डर तो सभी को है, मुझे भी पत्रकारिता जैसे जोखिम का काम नही कर, ऐसा काम करना चाहिए था जिसमें कोई खतरा नही होता लेकिन अगर मैने पत्रकारिता का कार्य चुना है तो मुझे अपने काम में ईमानदार तो होना ही चाहिए।

साहब , वक्त जो कभी थमता नही, यह वक्त भी गुजर जाएगा , इतिहास में दर्ज भी होगा ही लेकिन याद सब रखा जाएगा । “जय हिंद“

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