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पत्रकारिता की पाठशाला ‘वीर सक्सेना‘ को समर्पित रहेगी फोरम की परिचर्चा, आपको कभी भूल नही पाएंगे भाईसाहब
पत्रकारिता की पाठशाला ‘वीर सक्सेना‘ को समर्पित रहेगी फोरम की परिचर्चा, आपको कभी भूल नही पाएंगे भाईसाहब

(अनिल सक्सेना/ललकार )

उनकी पुत्रवधु का मोबाइल आया और रोते हुए कहा ‘पापा नही रहे‘ । यह सुनकर मैं स्तब्ध रह गया और मोबाइल पर प्रियंका को दो शब्द सांत्वना के भी नही कह पाया । मेरे कानों में भाईसाहब के शब्द गूंज रहे थे ‘कुछ नही होगा अनिल , देखना मैं फिर काम करने लगूंगा । मजबूत थे भाईसाहब , पता नही मौत से कैसे हार गए । बहुत यादें है भाईसाहब के साथ, उनकी ही स्टाइल में जीने और बात करने की सोचता था लेकिन जितना भी उन्होने सिखाया ,सीखने का प्रयास ही किया । एक जिद यह भी थी कि भाईसाहब आप मुझे पत्रकारिता में जरूर लाए लेकिन पत्रकारिता करूंगा अपनी योग्यता से, आपके नाम के दम पर नही । एक कहावत भी मन में रहती थी कि बरगद के नीचे कोई पौधा नही पनपता और भाईसाहब को मैं पत्रकारिता का बरगद ही मानता था लेकिन मैं फिर भी अंतिम दिनों तक उनसे ज्ञान बटोरता रहा । देर रात तक पाश्र्वनाथ कालोनी जयपुर वाले घर के बाहर वाले कमरे में उनसे बाते करते रहना। प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी से लेकर श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के साथ के किस्से सुनते हुए सोना और सुबह उठकर फिर वीर भाईसाहब को ही जीना। जर्मनी में रहते हुए उनके पत्रकारिता के किस्से , दिल्ली में राजस्थान पत्रिका, भास्कर में काम करते हुए का अनुभव और बहुत सी ज्ञान की बातें। बहुत अरसे तक दिन-रात यह सिलसिला चलता रहा था ।

बहुत सीखा लेकिन फिर भी वे यह कहते थे कि अनिल तुम होमसिक हो और पूरी तरह प्रैक्टिकल भी नही हो । मेरी कुछ बातों पर गुस्सा भी हो जाते लेकिन ज्यादा दिनों तक नाराज नही रहते। कई बार मतभेद रहा लेकिन मनभेद कभी नही हुआ । कई लोगों को लगता था कि अब अनिल से भाईसाहब कोई डायलाॅग नही करेंगे लेकिन कुछ दिनों बाद ही वे देखते कि अनिल ही सबसे नजदीक है भाईसाहब के ।

वर्ष 2011 में जयपुर पिंक सिटी प्रेस क्लब में हुआ राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम का पहला प्रदेश स्तरीय पत्रकार सम्मेलन हो, जयपुर खासा कोठी में राजस्थान के सबसे पुराने सन् 1949 से लगातार प्रकाशित साप्ताहिक अखबार ‘ललकार‘ के जयपुर संस्करण का शुभारंभ कार्यक्रम हो या मेरी बिटिया का विवाह कार्यक्रम हो , सभी में वे मेरे बड़े भाई के रूप में सबसे आगे रहे ।

कभी-कभी जैसे ही वे दिल्ली पहुंचते और मुझे मोबाइल कर कहते अनिल सब कुछ छोड़कर दिल्ली आ जाओ और मैं भी उनके पास पहुंच जाता । मैंने उनसे सीखने का कोई भी मौका नही छोड़ा । सच तो यह है कि वे ‘पत्रकारिता की पाठशाला‘ थे, जिनसे सीखते ही चले जाने का मन होता था ।

राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के द्वारा प्रदेश में प्रत्येक जिला स्तर पर होने वाली ‘पत्रकार परिचर्चाओं‘ का शुभारम्भ 20 फरवरी को जयपुर की ‘होटल अशोका‘ में होने जा रहा है, अब यह कार्यक्रम मेरे पत्रकारिता के गुरू श्री वीर सक्सेना को समर्पित रहेगा । सच तो यह है कि आपको हम कभी भुल नही पाएंगे वीर भाईसाहब । (Since 1949 ललकार समाचार पत्र)

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