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क्या इंसान की जान से ज्यादा राजनीति जरूरी है ?
क्या इंसान की जान से ज्यादा राजनीति जरूरी है ?

(अनिल सक्सेना/ललकार)

अभी कल ही अखबार में उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का बयान छपा कि वे भाजपा की वैक्सीन नही लगाएंगे । सवाल यह है कि क्या यह वैक्सीन हिदुंस्तान के वैज्ञानिकों ने नही बनाकर भाजपा नेताओं ने बनाई है ? ड्रग कंट्रोलर आॅफ इंडिया ने रविवार को कोविड-19 के इलाज के लिए दो वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति दी । ये दो वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन है। ध्यान रहे कि कोविशील्ड जहां असल में आॅक्सफोर्ड -एस्ट्राजेनेका का भारतीय संस्करण है वहीं कोवैक्सीन पूरी तरह भारत की अपनी वैक्सीन है जिसे स्वदेशी वैक्सीन भी कहा जा रहा है।

कोविशील्ड को भारत में सीरम इंस्टिटयूट आॅफ इंडिया कंपनी बना रही है और कोवैक्सीन को भारत बायोटेक कंपनी इंडियन काउंसिल आॅफ मेडिकल रिसर्च के साथ मिलकर बना रही है।

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी ट्वीट करते हुए कोवैक्सीन पर सवाल उठाए और उसके बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश भी पीछे नही रहे । केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन ने इन नेताओं को जवाब देते हुए कहा कि इस तरह के गंभीर मुददे का राजनीतिकरण करना किसी के लिए भी शर्मनाक है। उन्होने कहा कि कोविड-19 वैक्सीन को अनुमति देने के लिए विज्ञान समर्थित प्रोटोकाल का पालन किया गया है जिसको बदनाम न करें । केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि जागिए और महसूस करिए कि आप सिर्फ अपने आप को बदनाम कर रहें हो ।

कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटैक के चेयरमैन कृष्ण इल्ला ने बयान जारी कर कहा कि कोवैक्सीन ने अदभुत सुरक्षा आॅंकड़े दिए है जिसमें कई वायरल प्रोटीन ने मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया दी है। इधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि जिन दो वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी गई है, वे दोनो मेड इन इंडिया है। यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने के लिए हमारे वैज्ञानिक समुदाय की इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

एक तरफ अखिलेश यादव, शशि थरूर, जयराम रमेश जैसे पढ़े-लिखे विपक्षी नेता तो दूसरी ओर कुछ मुस्लिम समाज के ठेकेदार जो वैक्सीन में सुअर की चर्बी होने की अफवाह फैलाकर आमजन को संशय मंे डाल रहे है। इन नेताओं से ‘ललकार‘ का यही सवाल है कि ‘क्या इंसान की जान से ज्यादा राजनीति जरूरी है ?‘ सवाल यह भी है कि हम हिंदुस्तानी देश के महान वैज्ञानिकों , प्रधानमंत्री और केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री पर विश्वास करें या इन जैसे राजनीतिज्ञों पर जिन्हे इंसान की जान से भी ज्यादा राजनीति करना जरूरी है। ( 1949 ‘ललकार‘ समाचार पत्र)

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