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सवाल जरूर पूछिए , मालिक आप जनता है
सवाल जरूर पूछिए, मालिक आप जनता है, ये तो सब नौकर है

(अनिल सक्सेना /ललकार)

राज्य सरकार हो या केन्द्र सरकार । किसी की भी हो सरकार लेकिन गलत हो तो सरकार से सवाल जरूर पूछिए । भृष्टाचार करने वाले अधिकारियों से सवाल पूछिए और गलत खबर दिखाने वालों से भी सवाल पूछिए। रोज ही भृष्टाचार करते पकड़ने की खबरें अखबार में छप रही है । सच कितना है लेकिन कुछ लोग यह बताते है कि भृष्टाचार करते, वो ही पकड़े जा रहें है जिन्होने भृष्टाचार रोकने वालों को पैसा नही दिया या वे 200 रूपये या 500 रूपये के लिए पकड़े जा रहे है।

दूसरी ओर सवाल यह भी है कि क्या राजनीति व्यवसाय बन गई है ? शायद यही सही है कि अब राजनीति एक कॅरियर ही बन गया है , पहले पैसे लगाओं और बाद में करोड़ो कमाओ।

एक पहलू यह भी है कि कुछ मीडिया संस्थानों को छोड़ दिया जाए तो अब लगभग सभी मीडिया संस्थान प्रायोजित बन चुके है । जब सभी अच्छे पत्रकार सांसद और विधायक बनकर या राजनीतिक नियुक्ति प्राप्त कर सत्ता का मजा ले रहें है तो मैं ऐसा कर, क्यों नही, सत्ता का मजा लूं । मुझे समझ नही आता है कि यह जो लोग सिद्वान्त की बात करते है वो सिद्वान्त है कहां ? क्या मेरे जैसे लोगांे के लिए ही सिद्वान्त बचे है ? मेरी अपनी भी विचारधारा है और कभी-कभी मन होता है कि मैं अपनी विचारधारा को मिशन मीडिया के लिए क्यांे खत्म करूं ? जब मीडिया ही प्रायोजित हो चुकी है तो क्या मैंने ही मिशन पत्रकारिता करने का ठेका ले रखा है? शायद आज जो मेरे मन में आ रहा है वह ही, मै पहले अपना लेता तो शायद अब तक राजनीति में एक अच्छा मुकाम पा लेता ।

सवाल यह भी है कि क्या ऐसा कोई क्षेत्र है जिसे आदर्श बनाया जाए ? हमारे देश में फिल्मों की नकल रियल जिंदगी में की जाती है लेकिन सुशांत वाले मामलें में बड़े से बड़ों का चेहरा नशेड़ी के रूप में सामने आ चुका है । हाथरस और बाद में बलरामपुर की बात करना चाहिए लेकिन जब भी संसद में सांसद आमजन की बात छोड़ कर अपनी राजनीति की रोटियां सैंकने लगते है तो बहुत बुरा लगता है ।

सोचिए क्यों हो रहा है यह सब कुछ । कारण है कि हम और आप सरकार से सवाल नही पूछ रहें है , राजनीतिक दलों से सवाल नही पूछ रहें है। ऐसे पत्रकारों से सवाल पूछ नही रहें है, जो गलत कर रहें है या गलत दिखा रहें है । हम और आप ऐसे अधिकारियों से सवाल नही पूछ रहें है, जो भृष्टाचार कर रहें है। सच तो यह है कि हम और आप जिम्मेदार लोगो से सवाल ही नही पूछ रहें है । सवाल पूछेंगे तो सिस्टम सुधरेगा , पूछिए सवाल जिम्मेदारों से । ये भी सही है कि राजनीति, पत्रकारिता सहित हर क्षेत्र में कुछ लोग है, जो सच के साथ है नही तो इस कलयुग में , और पता नही क्या होता । ये ध्यान रखिए जो भी जिम्मेदार है , वह सभी जनता के नौकर है , मालिक नही । मालिक तो आप जनता ही है, फिर जिम्मेदारों से सवाल क्यों नही ? सवाल जरूर पूछिए ।

(लेखक अनिल सक्सेना राजस्थान के सबसे पुराने सन् 1949 से प्रकाशित साप्ताहिक अखबार “ललकार” के संपादक और राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के संस्थापक अध्यक्ष है। )

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