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क्या श्रम क़ानून के ऐतिहासिक बदलाव से श्रमिक और नियोक्ता दोनो को मिलेगा फायदा
क्या श्रम कानून के ऐतिहासिक बदलाव से श्रमिक और नियोक्ता दोनो को ही मिलेगा फायदा ?

(अनिल सक्सेना/बेबाक कलम)

श्रमिक संगठन श्रमिकों के हितों में ईमानदारी से कार्य करे, यह अच्छी बात है लेकिन देखा यह गया है कि कई बड़े औधोगिक संस्थानों में श्रमिक संगठन के सर्वेसर्वा अपने हित साधने में लगे रहते है , औधोगिक प्रबंधनों को भी ऐसे श्रमिक नेताओं की स्वार्थपूर्ति के लिए कई समझौते करने पड़ते है । इस सबमें श्रमिकों के हितों की रक्षा नही होकर श्रमिक नेता और प्रबंधन ही लाभ में रहते है। हम ऐसा नही कहते कि प्रत्येक औधोगिक संस्थानों में ऐसा ही चल रहा है , कई श्रमिक संगठन श्रमिक हितों में बहुत अच्छा कार्य कर रहें है। लेकिन अब केन्द्र सरकार के द्वारा पारित नए श्रम कानून का लाभ श्रमिक और नियोक्ता दोनो को ही मिलेगा ।

23 सितम्बर 2020 को राज्यसभा में श्रम कानून से जुड़े तीन अहम विधेयक उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा कार्यदशा संहिता 2020 , औधोगिक संबंध संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 पारित हुए। इनमें किसी भी प्रतिष्ठान में आजीविका सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा को विनियमित करने, औधोगिक विवादों की जांच एवं निर्धारण तथा कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा संबंधी प्रावधान किए गए है।

इस नये कानून का उद्देश्य श्रमिकों को सुरक्षा देना और जटिल नियमों को सरल बनाना है । अब 300 कर्मचारियों वाले कारखानों और कंपनियों को बिना किसी सरकारी मंजूरी के कर्मचारियों को काम पर रखने और निकालने की छूट होगी , फिलहाल 100 से कम कर्मचारियों वाले कारखानों या कंपनियों को छंटनी या यूनिट बंद करने से पहले सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती थी । वहीं बिल के मुताबिक किसी भी संगठन में काम करने वाला कोई भी कर्मचारी बिना 60 दिन पहले नोटिस दिए हड़ताल पर नही जा सकता है, फिलहाल यह अवधि 6 सप्ताह की है। देखा जाए तो लेबर कोड श्रमिक अधिकारों की रक्षा तो करेगा ही साथ में यह उधोगों को आसानी से चलाने में भी सहायक होगा । सबसे बड़ी बात यह है कि व्यापार चलाने के लिए अलग अलग जगह पंजीकरण और लाइसेंस की जरूरत नही होगी । इससे पहले तक देश में 44 श्रम काननू थे जो कि अब चार लेबर कोड में शामिल किए जा चुके है । वेतन से जुड़ा लेबर कोड 2019 में संसद से पास हो चुका है और इसके तहत न्यूनतम मजदूरी और समय पर वेतन मिलने का कानून अधिकार मिला था । यह तय है कि नए श्रम कानून से श्रमिकों को कई प्रकार की नई सुविधाएं मिलेगी जैसे श्रमिकों को नियुक्ति पत्र देना, वेतन का डिजिटल भुगतान, प्रत्येक साल श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य किया गया हैं इसके साथ ही उधमियों को कारोबार चलाने में आसानी हो , ऐसे प्रावधान किए गए है। नए श्रम कानून के अध्ययन करने से पता चलता है कि यह कानून नियोक्ता और श्रमिक दोनो के लिए लाभदायक साबित होगा ।

आॅक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन बिल 2020 कंपनियों को छूट देगा कि वे अधिकतर लोगों को काॅन्टैक्ट बेसिस पर नौकरी दे सके। काॅन्टैक्ट को कई बार बढ़ाया जा सकेगा और इसके लिए कोई सीमा तय नही की गई है। किसी भी मौजूदा कर्मचारी को काॅन्ट्रैक्ट वर्कर में तब्दील करने पर रोक का प्रावधान भी अब हटा दिया गया है। महिलाओं के लिए काम के घंटे सुबह 6 बजे से लेकर शाम 7 बजे के बीच ही रहेगा । शाम 7 बजे के बाद अगर काम कराया जा रहा है तो सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की होगी । कोई भी कर्मचारी एक हफ्ते में 6 दिन से ज्यादा काम नही कर सकता । ओवरटाइम कराने पर उस दिन का दोगुना पैसा देना होगा और बिना अपाॅइंटमेंट लेटर के किसी की भर्ती नही हो सकेगी ।

सोशल सिक्योरिटी बिल 2020 के नए प्रावधानों में बताया गया है कि जिन लोगों को फिक्सड टर्म बेसिस पर नौकरी मिलेगी , उन्हे उतने दिन के आधार पर गे्रच्युटी पाने का भी हक होगा यानी अब ग्रेच्युटी के लिए पांच साल का इंतजार नही करना पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि काॅन्ट्रैक्ट बेसिस पर काम करने वालों को वेतन के साथ साथ अब ग्रेच्युटी का लाभ भी मिलेगा भले ही काॅन्टैक्ट कितने दिन का भी हो।

देखा जाए तो श्रम कानून में बदलाव जरूरी था और केन्द्र सरकार ने इस ओर कदम उठाकर श्रमिकों के साथ ही नियोक्ताओं को भी इस कानून से लाभ दिया है इधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस कानून पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह किसानों के बाद मजदूरों पर वार है । कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि भाजपा सरकार अब ऐसा कानून लाई है जिसमें कर्मचारियों को नौकरी से निकालना आसान हो गया है।

(लेखक अनिल सक्सेना राजस्थान के सबसे पुराने सन् 1949 से प्रकाशित साप्ताहिक अखबार “ललकार” के संपादक और राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के संस्थापक अध्यक्ष है। )

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