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कृषि विधेयक का विरोध कितना जायज
कृषि विधेयक का विरोध कितना जायज ?

(अनिल सक्सेना/बेबाक कलम)

राजस्थान सहित कुछ हिस्सों में कांग्रेस और कुछ अन्य दल कृषि विधेयक का विरोध कर किसानों के हित में नही बता रहें है जबकी सरकार का कहना है कि विधेयक किसान विरोधी नही होकर उन्हे उनकी उपज का उचित मूल्य दिलानें में सहायक होगा। यहां तक कि इस विधेयक के विरोध में सरकार के घटक दल शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कृषि विधेयक के खिलाफ मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया ।

लोकसभा में कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य विधेयक 2020 और कृषक कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 पास हुए है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इन विधेयको के बावजूद देश में एमएसपी और सरकारी खरीद व्यवस्था बनी रहेगी ।

इन विधेयक के पारित होने के बाद किसान अपनी मर्जी का मालिक होगा। अब व्यापारी मंडी से बाहर भी किसानों की फसल खरीद सकेंगे। अब तक फसल की खरीद केवल मंडी में होती आई है, किसान अपनी उपज को अपने जिले की मंडी में ही बेच पाता था लेकिन अब वह कंही भी बेच सकेगा।

अब दाल, आलू, प्याज, अनाज और खाध तेल आदि को आवश्यक वस्तु नियम से बाहर कर स्टाॅक सीमा समाप्त कर दी है। राज्यों के अधिनियम के तहत संचालित मंडियां भी राज्य सरकारों के अनुसार चलती रहेगी । किसानों का भुगतान सुनिश्चित करने हेतु डिलवरी रसीद उसी दिन किसानो को दी जाएं साथ ही मूल्य के संबध में व्यापारियों के साथ बातचीत करने के लिए किसानों को सशक्त बनाने का प्रावधान भी रखा गया है। केन्द्र सरकार किसी भी केन्द्रीय संगठन के माध्यम से किसानों की उपज की मूल्य की जानकारी और मंडी आसूचना प्रणाली विकसित करेगी । कोई भी विवाद होने पर निपटाने के लिए बोर्ड गठित किया जाएगा जो 30 दिन के भीतर समाधान करेगा ।

इस विधेयक का उद्देश्य ढुलाई लागत , मंडियों में उत्पादों की बिक्री करते समय प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से किये गये विपणन शुल्कों का भार कम करना तथा फसल के बाद नुकसान को कम करने की मदद करना भी है साथ ही किसानों को उपज की बिक्री करने के लिए पूरी स्वतत्रता होगी । करार अधिनियम से किसान सशक्त होगा व समान स्तर पर एमएनसी , बड़े व्यापाारी आदि से करार कर सकेगा और सरकार उसके हितो ंको रक्षा करेगी ।

निवेश बढ़ने से जो अनाज पहले खराब हो जाता था अब नही होगा । उपभोक्ताओं को भी खेत और किसान से सीधे उत्पाद खरीदने की आजादी मिलेगी । इसके साथ ही कोई भी टैक्स नही लगने से किसान को ज्यादा दाम मिलेगा और उपभोक्ताओं को भी कम कीमत पर वस्तुएं मिलेगी । इसमें किसान सशक्तिकरण व संरक्षण कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक में कृषि करारों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का प्रावधान किया गया है । राष्ट्रीय कृषि नीति में परिपकल्पना की गई है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी को फार्मिंग एग्रीमेंट की व्यवस्था के माध्यम से बढ़ावा दिया जाएगा । साथ ही अनुबंधित किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज की आपूर्ति, सुनिश्चित तकनीकी सहायता, फसल स्वास्थ की निगरानी, लोन की सुविधा व फसल बीमा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी ।

इधर विपक्ष का कहना है कि इससे किसान बर्बाद हो जाएंगे और खेती पर निजी कंपनियों का कब्जा हो जाएगा । कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीटर पर लिखा कि किसान ही है जो खरीद खुदरा में और अपने उत्पाद की बिक्री थोक के भाव करते है । उन्होने लिखा कि मोदी सरकार के तीन काले अध्यादेश किसान-खेतीहार मजदूर पर घातक प्रहार है ताकि न तो उन्हे डैच् व हक मिले और मजबूरी में किसान अपनी जमीन पूॅंजीपतियों को बेच दे । आगे राहुल गांधी ने लिखा कि मोदी जी का एक और किसान विरोधी षडयंत्र ।

अब तो यह देश के किसानों को ही समझना होगा कि यह कृषि विधेयक उनके लिए लाभप्रद है या विपक्ष का विरोध जायज है ?

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