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एहतियात बिना क्या कोरोना बद से बदतर होगा ?
क्या हम WHO को गंभीरता से ले रहें है ?

WHO ने कहा कोरोना बद से बदतर होगा, एहतियात जरूरी

(अनिल सक्सेना/बेबाक कलम)

WHO प्रमुख डाॅ. टेड्रोस एडनाॅम गेब्रियेसस ने सोमवार को कहा कि दुनिया के कई सारे देश कोरोना से निपटने के मामलें में गलत दिशा में जा रहें है। उन्होने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण के मामलें में बढ़ रहें है और इससे साबित होता है कि जिन एहतियात और उपाय की बात की जा रही है , उनका पालन नही किया जा रहा है। डाॅ. टेड्रोस ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग ,हाथ धोना और मास्क पहनना इस महामारी से बचने के कारगर तरीके है और इन्हे गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है। उन्होने चेतावनी देते हुए कहा कि निकट भविष्य में ऐसा लगता नही है कि पहले की तरह सब कुछ सामान्य हो जाएगा । डाॅ. टेड्रोस ने कहा कि अगर बुनियादी चीजों का पालन नही किया गया तो एक ही रास्ता है कि कोरोना थमेगा नही और वो बढ़ता ही जाएगा , यह बद से बदतर होता जाएगा ।

सवाल यह है कि क्या हम सब कुछ जानते हुए भी कोरोना को रोकने के लिए बुनियादी चीजों का पालन कर रहें है ? यह भी सच है कि कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है और इससे होने वाली मौतों की संख्या भी बढ़ रही है । इसका अंत दिखाई भी नही दे रहा है, समझदार लोग डरे हुए है। सभी राजनीतिक दलों के कुछ नेताओं को इससे कुछ फर्क पड़ता नजर नही आ रहा है , यह लोग प्रतिदिन सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रहें है और लोगों की जान खतरें में डाल रहें है। सामाजिक संस्कारों को पूरा करने में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान नही रखा जा रहा है । पचास से ज्यादा लोग एक जगह एकत्रित होकर कोरोना को आमंत्रित करने का कार्य कर रहें है। सरकारें भी थक गई है , समझाते -समझाते । किसी को सोशल डिस्टेंसिंग के लिए या हाथ धोने के लिए या मास्क पहनने के लिए कह भर दो तो ऐसा लगता है कि जैसे कहने वाला ही अपराधी हो गया हो ।

कुछ लोगों का कहना है कि अब कोरोना की मार कम हो गई है लेकिन इन लोगों को कौन समझाए कि आंकड़ों को देखने से स्पष्ट हो रहा है कि कोरोना की मार दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है और ॅभ्व् प्रमुख डाॅ. टेड्रोस एडनाॅम गेब्रियेसस की माने तो यह कम नही होगा और बद से बदतर होगा । फिर कुछ लोग सोशल डिस्टेंसिंग रख ,हाथ धोकर और मास्क पहन कर इस महामारी से बचने के कारगर तरीकों को गंभीरता से क्यों नही ले रहें है। सीधी बात है कि एक संक्रमित होगा और उपायों का ध्यान नही रखेगा , इलाज नही करवाएगा तो पूरे समाज को खतरे में डालेगा ।

दूसरी बात कोरोना संक्रमित और उनके परिवारजनों से उचित तरीके से पेश आना और उनकी मदद करना भी कोरोना योद्वाओं का पहला दायित्व है। देखा यह जा रहा है कि कई स्थानों में कोरोना संक्रमित लोगों और उनके परिवारजनों को सही गाइड नही किया जा रहा है ,कुछ जिम्मेदार लोगों का तरीका तो बहुत ही गैर जिम्मेदाराना भरा है । ऐसा नही है कि सभी जिम्मेदार लोग ऐसे है लेकिन एक- दो जनों के ऐसे होने से ही पूरे कोरोना योद्वा जगत के लिए गलत संदेश जाता है। हमें यह ध्यान देना है कि वो व्यक्ति संकट में है इसलिए ही हमारे पास आया है और हम अपने अच्छे व्यवहार और अनुभव से उसकी मदद कर सकते है।

यूथ मूवमेंट के संस्थापक अध्यक्ष शाश्वत सक्सेना बताते है कि यूथ मूवमेंट प्रतिदिन तीन से चार परिवारों की मदद करने का कार्य कर रहा है और उन्हे सरकार के दिशा-निर्देश बताते हुए मार्गदर्शन भी कर रहा है। सच तो यह है कि यही वक्त है जब सामाजिक संस्थाएं आम-आदमी को जागरूक करे और उनकी मदद करे। हमें भी बद से बदतर स्थिति से बचने के लिए कारगर तरीके सोशल डिस्टेंसिंग ,हाथ धोना और मास्क पहनने को गंभीरता से लेना चाहिए ।

(लेखक अनिल सक्सेना राजस्थान के सबसे पुराने सन् 1949 से प्रकाशित साप्ताहिक अखबार “ललकार” के संपादक और राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के संस्थापक अध्यक्ष है। )

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