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विशेष समिति निभाएगी सोनिया गांधी के लिए निगरानी और समन्वय की जिम्मेदारी

पिछले महीने हुई कांग्रेस कार्य समिति की हंगामेदार बैठक के बाद अब नेतृत्व के मुद्दे पर सोनिया गांधी को खत लिखने वाले ज्यादातर नेताओं के पर कतर दिये गये है। शुक्रवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने संगठन में कई बड़े बदलाव किए। उन बदलावों में सबसे अहम है 6 सदस्यों वाली विशेष सलाहकार समिति का गठन। यह समिति ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अगले सत्र तक पार्टी के कामकाज को लेकर सलाह देगी।

सीनियर नेताओं के 'ग्रुप-23' के लेटर बम से 24 अगस्त को हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में काफी हंगामा हुआ था। तब उस विवाद को देखते हुए सीडब्लूसी में यह फैसला लिया गया था कि सोनिया गांधी के सहयोग के लिए एक विशेष समिति का गठन होगा। उसी कड़ी में शुक्रवार को सोनिया ने 6 सदस्यीय विशेष सलाहकार समिति का ऐलान किया। इसमें गांधी परिवार के बेहद करीबी माने जाने वाले लोगों को जगह दी गई है। हालांकि, लैटर लिखन वाले नेताओं में शामिल मुकुल वासनिक को इस समिति का सदस्य बनाया गया है।

कौन-कौन बनाए गए हैं सोनिया के 'सलाहकार'

अमहद पटेल

अहमद पटेल की गिनती सोनिया गांधी के सबसे करीबी और भरोसेमंद सिपहसालारों में होती है। पार्टी से जुड़ी हर छोटी से बड़ी बातों में पटेल की राय काफी मायने रखती है। वह सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार रह चुके हैं। पार्टी में जब-जब कोई संकट आता है, अहमद पटेल संकट मोचक की भूमिका में होते हैं।

एके एंटनी

पूर्व केंद्रीय मंत्री एके एंटनी की पहचान भी गांधी परिवार के भरोसेमंद सहयोगी के तौर पर होती है। यही वजह है कि 2014 लोकसभा चुनाव की करारी हार के बाद सोनिया गांधी ने उसकी समीक्षा के लिए जिस शख्स पर भरोसा जताया, वह एके एंटनी ही थे। यह बात दीगर है कि 2019 में भी कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी। एंटनी इंदिरा गांधी के करीबी थे लेकिन 80 के दशक में उनके कांग्रेस छोड़कर अलग पार्टी बनाने और ईके नयनार की अगुआई वाली केरल की तत्कालीन लेफ्ट सरकार में शामिल होने से वह बहुत नाराज हुईं। बाद में एंटनी ने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय जरूर किया लेकिन इंदिरा के जीते-जी उन्हें संगठन में कोई पद नहीं मिला। बाद में एंटनी के गांधी परिवार से रिश्ते न सिर्फ सुधरे बल्कि समय के साथ और मजबूत होते गए।

अंबिका सोनी

सोनिया ने जिस 6 सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है, उसमें अंबिका सोनी का नाम भी शामिल है। गांधी परिवार से उनके परिवार के रिश्ते बहुत ही पुराने हैं। उन्हें इंदिरा गांधी कांग्रेस में लेकर आई थीं। उनके पिता नकुल सेन वाधवा नौकरशाह थे और उनकी गिनती जवाहर लाल नेहरू के करीबी अफसरों में होती थी।

केसी वेणुगोपाल

एंटनी की तरह वेणुगोपाल भी केरल से हैं। गांधी परिवार से उनकी करीबी इसी बात से समझी जा सकती है कि राजस्थान में जब कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार पर संकट के बादल छाए थे तब जिन लोगों को पार्टी ने वहां दूत बनाकर भेजा, उनमें वेणुगोपाल भी थे। उन्हें राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। 2017 में जब राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बने, तब उन्होंने वेणुगोपाल को कर्नाटक जैसे बड़े राज्य का प्रभारी महासचिव बनाया था। इसके अलावा कई चुनावों के दौरान पार्टी के वॉर रूम के वह इंचार्ज रह चुके हैं।

रणदीप सुरजेवाला

ओम प्रकाश चौटाला जैसे हरियाणवी दिग्गज को उनके मुख्यमंत्री रहते विधानसभा चुनाव में एक नहीं बल्कि दो-दो बार हराने वाले (1996 और 2005) रणदीप सुरजेवाला गांधी परिवार के बेहद करीबी हैं। यही वजह है कि हरियाणा का पिछला विधानसभा चुनाव और उससे ठीक पहले उप चुनाव में भी शिकस्त खाने के बाद पार्टी में उनका रुतबा कम नहीं हुआ। महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुरजेवाला ही पार्टी का पक्ष रखते नजर आते हैं। राजस्थान संकट को हल करने के लिए सोनिया गांधी ने जिस टीम को दिल्ली से जयपुर भेजा था, उसमें सुरजेवाला भी थे।

मुकुल वासनिक

मुकल वासनिक कांग्रेस के कद्दावर दलित नेताओं में गिने जाते हैं। उन्हें गांधी परिवार का करीबी भी समझा जाता है। हालांकि, वह उन 23 बड़े नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने नेतृत्व के मुद्दे पर खत लिखा था। खत लिखने वाले नेताओं में वह इकलौते हैं, जिन्हें सोनिया की विशेष सलाहकार समिति में शामिल किया गया है। उसके अलावा उन्हें मध्य प्रदेश का प्रभार भी दिया गया है। इससे पहले वासनिक के पास कई राज्यों का प्रभार था।

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