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Lalkar / Delhi * उधोगो को लेना होगा निर्णय * Bebak kalam * मुख्यमंत्री गहलोत ने सोशल मीडिया डे पर संदेश दिया * केंद्र सरकार का ऐतिहासिक फैसला * मीडिया को डर कैसा * जिला पुलिस विशेष टीम की सफलता * करना सब कुछ आपको है , हम क्या करे , हम तो सरकार है * राजस्थान मीडिया एक्शन फ़ोरम का सवाल * पूर्व चिकित्सा मंत्री सराफ ने चिकित्सा मंत्री पर लगाए आरोप *
करना सब कुछ आपको है , हम क्या करे , हम तो सरकार है

(अनिल सक्सेना/ललकार)

कोरोना वायरस से मरने की जगह वैसे ही मर जाए तो अच्छा है , यह भावना आम आदमी में लगातार प्रबल हो रही है और इसका कारण कोरोना वायरस नही होकर सरकारी अव्यवस्था ही है। सरकार आम आदमी से बहुत कुछ चाहती है लेकिन उसका दायित्व कहीं भी दिखाई नही दे रहा है सिर्फ सीख देने के अलावा। मकान मालिक किरायेदार से किराया नही ले , निजी विधालय शिक्षकों को वेतन दे लेकिन विधार्थियों से फीस नही ले, काम हो या ना हो अपने यहां काम करने वाले को नौकरी से नही निकाला जाए और वेतन पूरा दें, समर्थ व्यक्ति जरूरतमंद को भोजन और अन्य सहायता दे और सरकार को पैसा भी दे क्यों कि हम सरकार है भैया।

बेरोजगारी बढ़ रही है , महंगाई आसमान को छू रही है लेकिन हमें आम आदमी से क्या लेना-देना । हमें तो राजनीति करनी है कभी सीमा विवाद को लेकर और कभी अन्य मामलों को लेकर। आम आदमी की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है लेकिन हमें क्या, हम तो सरकार है। पानी- बिजली का बिल तो देना ही होगा , सरकार के टेक्स तो देने ही होगें , लोन की किस्त तो भरनी ही होगी , वाहनों के टेक्स तो देने ही होगें। भाई, हमारा कोई बकाया नही होना चाहिए क्यों कि हम तो सरकार है ।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अब तक हिंदुस्तान में कोरोना संक्रमण के मामले लगभग 6 लाख के करीब पहुंचने वाले है । कोविड-19 के मामलें में जो कानून बनें है वो आम आदमी के लिए अलग और प्रभावशाली लोगों और सरकार के लिए अलग दिखाई दे रहें है। प्रतिदिन अखबारों में प्रभावशालियों के फोटो प्रकाशित हो रहें है जो नियमों की धज्जियां उड़ा रहें है और आम आदमी पर मामले दर्ज किए जा रहें है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बार-बार कह रहें है कि सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखें । राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट साफगोई से कहते है कि कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में हम सोशल डिस्टेंसिंग नही रख पाए, इसके लिए हमें खेद है।

हैदराबाद के सरकारी अस्पताल में मरने वाले शख्स रवि कुमार ने मरने से पहले रिकार्ड किया कि मुझे साॅंस नही आ रही है लेकिन बार-बार मिन्नतें करने के बाद भी चिकित्सकों ने मेरी आॅक्सीजन बंद कर दी। इसी तरह जयपुर के सरकारी अस्पताल में कोरोना संक्रमित जयपुर निवासी नवरतन ने 14 सैंकेंड के वीडियों में कहा कि यहां पर कोई इलाज नही होता , सीधा लाकर पटक देतें है और इसलिए मैं आत्महत्या कर रहा हूं । हैदराबाद के पी.श्रीकांत बताते है कि वो अपनी पत्नी को लेकर 9 अस्पतालों में गए लेकिन किसी ने उनकी मदद नही की और अन्त मंे उनकी पत्नी पी.रोहिता ने दम तोड़ दिया । दिल्ली में भी इस तरह की घटनाओं की जानकारी लगातार मिल रही है ।

इन घटनाओं से स्पष्ट झलक रहा है कि व्यक्ति बीमारी से नही बल्कि कोरोना की भयावता की पराकाष्ठा और अव्यवस्था से मर रहा है दूसरी ओर महंगाई लगातार बढ़ रही है, लोग बेरोजगार हो रहे है, देश में कई परिवारों की आर्थिक स्थितियां बद से बदतर हो रही है लेकिन करना सब कुछ आपको ही है, हम क्या करें, हम तो सरकार है।

(लेखक अनिल सक्सेना राजस्थान के सबसे पुराने सन् 1949 से प्रकाशित साप्ताहिक अखबार ”ललकार“ के संपादक और राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के संस्थापक अध्यक्ष है। )

नोट- राजस्थान के सबसे पुराने सन् 1949 से प्रकाशित साप्ताहिक अखबार ”ललकार“ की ई-पत्रिका को पढ़ने के लिए पर क्लिक कीजिए।

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