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पूर्व चिकित्सा मंत्री सराफ ने चिकित्सा मंत्री पर लगाए आरोप

जयपुर। पूर्व चिकित्सा मंत्री एवं मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ ने कहा कि चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा नेशनल हैल्थ मिशन के तहत 2500 कम्यूनिटी हैल्थ अधिकारी के पदों पर अपने चहेतों व मनमानी भर्तियां करवाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने उस पूरी भर्ती प्रक्रिया को भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाकर और कई निर्दोष कार्मिकों को निलंबित कर व हटाकर रोक दिया था। सराफ ने कहा कि उस समय भी प्रदेश के एक प्रमुख समाचार पत्र ने मंत्री की मनमानी और बेवजह परीक्षा को रदृद किए जाने को लेकर खुलासा किया था और विधानसभा में स्वयं उन्होंने भी यह मामला उठाया था।

सराफ ने कहा कि इस भर्ती को कराने के लिए तब मंत्री ने कहा था कि जल्दी ही पूरी पारदर्शिता से इस भर्ती को करवाया जाएगा। लेकिन आज तक इस भर्ती को पूरा नहीं किया गया है। जिसका खमियाजा प्रदेश के 30 हजार बेरोजगारों को उठाना पड़ रहा है, जो इस भर्ती का इंतजार कर रहे थे। पूर्व चिकित्सा मंत्री ने कहा कि चिकित्सा मंत्री और उनके मातहत अधिकारियों का यह आपराधिक कृत्य है कि उन्होंने अपनी कुर्सी का दुरुपयोग करते हुए अपने मातहत अधिकारियों को बेवजह प्रताड़ित, अपमानित करते हुए अपने अपने पदों से हटाया और उसके बाद आज तक यह सिदृध नहीं कर सके कि किसने पैसे लिए, किसने दिए और उनके साक्ष्य और प्रमाण क्या है। पूर्व चिकित्सा मंत्री ने कहा कि निलंबित किए गए कार्मिक की पुन:बहाली भी यह सिदृध कर देती है कि जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे, वे पूरी तरह आधारहीन और राजनीतिक महत्वकांक्षा से प्रेरित थे। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में साफ हो गया है कि चिकित्सा मंत्री स्वयं ही इस भर्ती में रुचि लेकर अपने चहेतों की भर्तियां करवाना चाहते थे, यह उस समय भी प्रमाणित हो गया था, जब वे इस भर्ती के नियम बदलवाना चाहते थे।

सराफ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरी भर्ती को रद्द करने के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के निर्णय से प्रदेश को जो 600 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है उसकी भरपाई कैसे होगी और कौन करेगा, यह भी स्पष्ट किया जाए तथा पूरे घटनाक्रम में चिकित्सा मंत्री व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से उठाए गए मनमाने कदमों की न्यायिक जांच करवाकर प्रदेश के बेरोजगारों और स्वास्थ्य कार्मिक चयन प्रणाली से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त से सख्त कार्यवाही करें। उन्होंने चिकित्सा मंत्री से भी मांग की है कि जब प्रकरण में दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है तो अब उन्हें पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है।

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