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अति सर्वत्र वर्जयते“ लीडरशीप में षडयंत्र या पर्दे के पीछे अपनों को ही नुकसान करने की भावना ना हो

(अनिल सक्सेना/ललकार)

कुछ 20 साल से भी पुरानी बात होगी, एक दिन मेरे पास बचपन के मित्र भाजपा नेता प्रदीप सिंह नाहरगढ़ का फोन आया और उन्होने बताया कि भदेसर क्षेत्र के रहने वाले हाली (मजदूर) की तबियत खराब है और उसे खुन की जरूरत है । मैं तुरन्त अस्पताल पहुंचा और जानकारी मिली कि जो मेरा ब्लड ग्रुप है वो ही उस मजदूर का ब्लड ग्रुप है , मैने तुरन्त चिकित्सक से बात की और उसे ब्लड डोनेट कर दिया । यह उन दिनों की बात है, जब लोग रक्तदान करने में घबराते थे । पिछले 30 सालों में ऐसे ही कई वाक्ये है, मैने हमेशा प्रयास किया कि मैं जरूरतमंद लोगों के काम आ सकूं । शायद यही कारण रहा कि कई क्षेत्र के लोग मुझसे भावनात्मक रूप से जुड़ गए और संपर्क में रहे ।

एक दिन पूर्व मंत्री श्रीचन्द कृपलानी जी के यहां गमी में बैठने गया तो कुछ लोग वहां पर थे । कुछ देर बाद मैं जैसे ही वहां से जाने के लिए उठा तो एक व्यक्ति मेरे पास आया और उसके साथ पांच लोग भी आए। जानकारी मिली कि यह सब जिला परिषद में कार्य करते है , उनमें से एक व्यक्ति ने सभी से मेरा परिचय कराते हुए बताया कि इन्ही के कारण मेरी बहन की जान बच पाई है।

जब बेंगू विधायक राजेन्द्र सिंह बिधुड़ी जी के यहां गमी में बैठने दिल्ली गया तो उन्होने अपने बड़े भाई से यह कहते हुए परिचय कराया कि यह एक अच्छे पत्रकार है और लोगों की जरूरत पड़ने पर काम भी आते है ।

आज यह सब बात बताने की आवश्यकता इसलिए पड़ी कि मुझे लगता है कि शायद इन्ही कारणों से मुझे ऐसी खबरें मिल जाया करती है, जिसे एक पत्रकार के पास पहुंचना मुश्किल ही होता है। एक मेरे शुभचिंतक ने बताया कि एक ऐसे भी राजनेता है जो पर्दे के पीछे अपनों की ही कब्र खोदने में लगे रहते है। लेकिन सामने आने पर यह जाहिर करते है कि उनके जैसा तो कोई भी अच्छा नेता नही है। अब राजनीति में शुचिता की बात करना ही बेमानी हो गया है लेकिन आज भी कई लीडर है जो स्वच्छ राजनीति कर रहें है।

मेवाड़ की बात करें और विशेष रूप से मेरे क्षेत्र की बात करें तो मैं कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक राजेन्द्र ंिसह बिधूड़ी जी और भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री नन्द लाल मीणा जी ऐसे नेता है जो सीधे मूंह पर बात कहना पसंद करते है , लड़ाई तो लड़ाई और दोस्ती तो दोस्ती । मेरा स्वभाव भी यही रहा पीछे कुछ नही , मन में कुछ नही, बस सीधी बात और शायद यही कारण है कि मैं श्री नन्द लाल मीणा जी के नजदीक भी बहुत रहा और बिधूड़ी जी की कार्यशैली को भी पसन्द किया ।

आप पाॅवरफुल है और लीडर भी है तो किसी को भी पीठ पीछे गिराने या नुकसान करने के प्रयास नही कीजिए, आप अच्छा नही कर सकते तो बुरा भी नही कीजिए क्यों कि भगवान हनुमान जी की लाठी में देर नही है। यह सही ही है कि “अति सर्वत्र वर्जयते“।

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