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ऐसे थे शिवचरण माथुर साहब
जिस विधानसभा से चुनाव जीत कर आता हूं , उसमें मेरी जाति का एक भी वोट नही

पूर्व मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर की पुण्यतिथि पर विशेष

(अनिल सक्सेना”ललकार“)

यह बात सन् 1999 के शायद नवम्बर माह की थी , मैने चित्तौड़गढ़ से फोन के द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवचरण माथुर जी से समय लिया और तय दिन जयपुर पंहुच कर उनसे मिला । मुझे उनसे मिलने की एक जिज्ञासा के साथ उत्साह भी था कि मैं प्रदेश के सबसे बड़े पद पर रहने वाले व्यक्तित्व से पहली बार मिलने जा रहा हूं। वे उन दिनों प्रशासनिक सुधार आयोग के अध्यक्ष हुआ करते थे । मैं उनके निवास स्थान पर पहुंचा और जब उनसे मिला तो लगा ही नही कि मैं बहुत बड़े व्यक्ति से मिल रहा हूं । बडे ही प्यार से उन्होने मेरे बारें में पूछा और मेरे परिवार की जानकारी ली , इस बीच चाय और नाश्ता आ गया ।

मैंने अपनी आदत के अनुसार उनसे बहुत बातें की और उन्होने भी मुझे बहुत धैर्य से सुना । कायस्थ समाज की बात भी आई तो उन्होने कहा अनिल तुम्हे पता है जिस विधानसभा से मैं जीत कर आता हूं, उसमें एक भी परिवार कायस्थ समाज का नही है । मुझे बहुत आश्चर्य हुआ क्यों कि मुझे उन दिनों राजस्थान के विधानसभा क्षेत्रों की जानकारी नही थी । मैने उनसे कहा कि सर, कहा तो जाता है कि बिना जाति के आधार के चुनाव नही जीते जाते तो उन्होने कहा कि यही तो मैं बता रहा हूं कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में कोई भी कायस्थ परिवार नही था मतलब कि एक भी वोटर कायस्थ नही था। उन्होने और भी कई बातें बताई और मुझे अच्छा काम करते रहने के लिए समझाया । लगभग डेढ़ घन्टे उनके साथ रहकर, मैं जब निकला तो एक नई उर्जा से भरा हुआ था ।

उस पहली मुलाकात के बाद मै उनसे राजस्थान कायस्थ महासभा के एक कार्यक्रम में जयपुर में मिला और आशीर्वाद लिया । इसके बाद मैं कभी भी उनसे नही मिल पाया ।

आज उनकी दसवी पुण्यतिथि पर मुझे यह सब याद आया कि ऐसे भी नेता रहे है जो बिना किसी जाति के आधार पर अपने काम और लोकप्रियता के आधार पर लगातार चुनाव जीतते आए । क्या आज की परिस्थिति में यह सब संभव है ? शायद नही, क्यों कि आज राजनीतिक पार्टीयां टिकिट का बंटवारा जाति के आधार पर ही कर रही है। अब यह समय युवाओं का है और आज का युवा परिवर्तन चाहता है । अब समय ही बताएगा कि माननीय शिवचरण माथुर जी की इच्छा के अनुसार जाति के आधार पर टिकिट नही देकर अच्छे और सच्चे व्यक्ति को टिकिट दिया जाना कब से शुरू होगा ?

(लेखक अनिल सक्सेना राजस्थान के सबसे पुराने सन् 1949 से प्रकाशित साप्ताहिक अखबार ”ललकार“ के संपादक और राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के संस्थापक अध्यक्ष है। )

नोट- राजस्थान के सबसे पुराने सन् 1949 से प्रकाशित साप्ताहिक अखबार ”ललकार“ की ई-पत्रिका को पढ़ने के लिए पर क्लिक कीजिए।

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