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हिंदुस्तान चाहता है , शहीदों का बलिदान व्यर्थ ना जाए
धोखेबाज चीन और हिंदुस्तान

(अनिल सक्सेना)

हिंदुस्तान के विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने अपने एक बयान में कहा कि सीमा पर सैनिक हमेशा हथियार के साथ तैनात रहते है, 15 जून को भी ऐसा ही हुआ । उन्होने यह भी बताया कि 1996 और 2005 के समझौतों के तहत हम लंबे समय से आमने-सामने होने पर हथियारों का इस्तेमाल नही करते है।

सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रहा चेलानी ने ट्विटर पर लिखा है कि चीन न तो द्विपक्षीय समझौतों की पालना करता है और ना ही अंतरराष्ट्रीय नियमों का । सच यह है कि चीन द्विपक्षीय समझौतो को दूसरे देशों के खिलाफ इस्तेमाल करता है और खुद पर कभी लागू नही करता है।

सवाल यह है कि सेना के जवान हथियार लेकर गए तो जब हिंदुस्तानी सैनिकों पर चीनी बेरहमी से हमला कर रहे थे तब उन्होने आत्मरक्षा के लिए हथियारों को इस्तेमाल क्यों नही किया ? सबसे बड़ी बात यह है कि सेना के एक कर्नल और अन्य सैनिकों पर चीन के सैनिकों ने कील लगे लोहे की राॅड से हमला किया। इस बात पर चीनी कोई सफाई नही दे रहे है, उनका तो बस यही कहना है कि भारतीय सैनिक लाइन आॅफ एक्चुअल कन्ट्रोल पार कर गए और चीन के सैनिकों को उकसाना शुरू कर दिया और यहां तक कि हमला बोल दिया और इसके बाद ही आमने सामने झड़प शुरू हुई।

हिंदुस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने प्रेस वार्ता कर बताया कि भारत और चीन सैन्य और राजनयिक स्तर पर बात कर रहें है । उन्होने बताया कि गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद से भारत का कोई भी सैनिक गायब नही है।

सेना के पूर्व अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एच.एस.पनाग ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखे आलेख में बताया कि पिछले सात सालों से चीन ऐसा कर रहा है । 2013 में डेपसांग, 2014 में चुमार, 2017 में डोकलाम, और 2020 में लद्वाख और अब गलवान घाटी।

दरअसल हिंदुस्तान और चीन के बीच अब तक कोई सीमांकन नही हुआ है और सीमा निर्धारण नही होने के कारण चीन का दावा बढ़ता ही जा रहा है। अब वो गलवान घाटी पर दावा कर रहा है , जिस पर कोई विवाद नही था ।

सच तो यह है कि यह इलाके सामरिक रूप से बहुत अहम है । हिंदुस्तान ने इन ठिकानों को बिना सैनिकों के छोड़ बड़ी गलती की थी । इतिहास पर नजर दोड़ाएं तो जानकारी मिलती है कि चीन के साथ लगातार चल रहा विवाद नवंबर 1959 के शुरू में हिंसक हो गया था जब लद्वाख के कोंगकाला में पहली बार चीन ने खून बहाया था ।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक में कहा कि आज हमारी सेनाएं इतनी ताकतवर है कि कोई भी देश हमारी एक इंच जमीन की ओर देखने की हिमाकत नही कर सकता । उन्होने कहा कि भारत माता की ओर आंख उठाने वाले को सेना मंुहतोड़ सबक सिखाएगी ।

इधर आज शनिवार को भारत के वायु सेना प्रमुख आर.के.एस.भदौरिया ने शनिवार को कहा कि भारत शांति स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्व है लेकिन गलवान घाटी में दिए गए सैनिकों के बलिदान को व्यर्थ नही जाने देंगे ।

हिंदुस्तान भी यही चाहता है कि भारत माता की ओर आंख उठाने वाले को सबक सिखाया जाए और जो सैनिक शहीद हुए उनका बलिदान व्यर्थ नही जाए ।

(लेखक अनिल सक्सेना राजस्थान के सबसे पुराने सन् 1949 से प्रकाशित साप्ताहिक अखबार ”ललकार“ के संपादक और राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के संस्थापक अध्यक्ष है। )

नोट- राजस्थान के सबसे पुराने सन् 1949 से प्रकाशित साप्ताहिक अखबार ”ललकार“ की ई-पत्रिका को पढ़ने के लिए पर क्लिक कीजिए।

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