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बेबाक कलम
राज्यसभा चुनाव में राजस्थान के लिए कांग्रेस के संकटमोचक बने अविनाश पांडे

राजस्थान में कांग्रेस को 2 सीट और भाजपा को 1 सीट मिलना तय

क्राॅस वोटिंग नही हुई तो भाजपा को 8, कांग्रेस को 4, वाईएसआर कांग्रेस को 4, झारखंड मुक्ति मोर्चा को 1 सीट मिलना निश्चित

(अनिल सक्सेना/बेबाक ललकार)

राज्यसभा की 18 सीटों के लिए आज होने जा रहे चुनाव में राजस्थान की 3 सीटों में कांग्रेस की 2 सीटों पर होने वाली जीत का श्रेय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राजस्थान प्रभारी पूर्व सांसद अविनाश पांडे की रणनीति और राज्य की राजनीति पर पूरी तरह पकड़ और माॅनिटरिंग पर ही जाता है। अविनाश पांडे ने 11 जून से ही जयपुर में डेरा डाला हुआ है और वे पहले दिन से ही कांग्रेस के विधायकों के साथ बने रहे और स्थिति पर नजर बनाए रखी।

यह भी तय है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की दूरदर्शिता भी इस चुनाव में काम आई अन्यथा कितना सच है लेकिन माना यह जा रहा था कि कांग्रेस राज्यसभा की एक सीट ही जीत पाती और राज्य सरकार पर भी संकट आने में देर नही लगती । राजस्थान प्रदेश भाजपा की ओर से संख्या बल नही होने के बाद भी चैथे उम्मीदवार को खड़ा करना एक सोची समझी रणनीति और पूर्व नियोजित योजना का ही हिस्सा था । राजस्थान में भाजपा की योजना सफल नही हो पाई तो दूसरी ओर मणिपुर में भाजपा सरकार के 6 विधायकों के द्वारा समर्थन वापस लेने से समीकरण बदल गए है। गौरतलब है कि मणिपुर मंे भी एक सीट भाजपा को मिलना तय थी ।

राज्यसभा में 245 सदस्य होते है और बहुमत का आंकड़ा 123 होता है। आज के चुनाव में क्राॅस वोटिंग नही हुई तो भाजपा को 8, कांग्रेस को 4, वाईएसआर कांग्रेस को 4, झारखंड मुक्ति मोर्चा को 1 सीट मिलना निश्चित है। भाजपा के पास इस समय 75 सदस्य है और इस चुनाव में 8 सीटें मिलने से कुल सदस्य 83 हो जाएंगे । इन चुनावों के बाद नवम्बर में 11 सीटों के लिए चुनाव होने है जिसमें अकेले उत्तरप्रदेश में 9 सीटों पर और उत्तराखंड और अरूणाचल प्रदेश में एक-एक सीट पर चुनाव होने है । राजनीतिक पार्टीयों के विधायकों के हिसाब से 11 में से 10 सीटें भाजपा को मिलेगी और 1 सीट समाजवादी पार्टी को मिलेगी ।

वर्ष 1990 के पहले तक राज्यसभा में कांगे्रस का बहुमत होता था लेकिन उसके बाद सरकार किसी की भी हो, इस सदन में किसी को भी बहुमत नही मिल पाया । लगता नही कि इसके बाद भी भाजपा सरकार को किसी भी विधेयक को पारित कराने में कोई कठिनाई होगी क्यों कि बीजू जनता दल के 9 और तेलगांना राष्ट्र समिति के 7 सदस्य और अन्य क्षेत्रीय पार्टियां हमेशा भाजपा सरकार के साथ ही रही है।

कुछ भी हो लेकिन इसमें कोई दो राय नही है कि प्रदेश में कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की रणनीति और दूरदर्शिता के कारण आने वाले दिनों में भी राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर कोई भी संकट आता दिखाई नही पड़ता है।

(लेखक अनिल सक्सेना राजस्थान के सबसे पुराने सन् 1949 से प्रकाशित साप्ताहिक अखबार ”ललकार“ के संपादक और राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के संस्थापक अध्यक्ष है। )

नोट- राजस्थान के सबसे पुराने सन् 1949 से प्रकाशित साप्ताहिक अखबार ”ललकार“ की ई-पत्रिका को पढ़ने के लिए www.lalkarnews.com पर क्लिक कीजिए।

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