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क्या श्रम क़ानून के ऐतिहासिक बदलाव से श्रमिक और नियोक्ता दोनो को मिलेगा फायदा * कृषि विधेयक का विरोध कितना जायज * एहतियात बिना क्या कोरोना बद से बदतर होगा ? * एहतियात बिना क्या कोरोना बद से बदतर होगा ? * कहां जा रही है टीवी पत्रकारिता और हम * अभी राजस्थान कांग्रेस में सबकुछ अच्छा नही * अभी राजस्थान कांग्रेस में सबकुछ अच्छा नही * विशेष समिति निभाएगी सोनिया गांधी के लिए निगरानी और समन्वय की जिम्मेदारी * राजस्थान सरकार के ट्रबल शूटर रहे अविनाश पांडे और अन्य नेताओं को दी अहम जिम्मेदारी * क्या कांग्रेस को आत्मविश्लेषण की जरूरत है ? *
कोरोना का असर: एंटीबायोटिक की बिक्री हुई कम, क्या कम बीमार पड़ रहे लोग?
लॉकडाउन का असर दवाइयों की आपूर्ति पर भले ही ना पड़ा हो लेकिन दवाइयों की बिक्री इससे ज़रूर प्रभावित हुई है. कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन में एंटीबायोटिक समेत कई और दवाओं की बिक्री में कमी आई है. लोग अब पहले की तरह एंटीबायोटिक दवाएं नहीं ख़रीद रहे हैं.एंटीबायोटिक की बिक्री कम होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. लेकिन इसके दो बड़े कारण हैं एक तो ये कि लॉकडाउन में अस्पताल में ओपीडी और निजी क्लिनिक का कम खुलना और दूसरा छोटी-मोटी बीमारियों के लिए दवाएं ना लेना.पहले लोग सर्दी, जुकाम, खांसी जैसी बीमारियों के लिए क्लिनिक पर चले जाया करते थे लेकिन लॉकडाउन में क्लिनिक ही बंद हैं. ऐसे में डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं नहीं लिख रहे हैं. फिर लोग कोरोना वायरस के डर से खुद भी डॉक्टर के पास जाने से बच रहे हैं. वो केमिस्ट से भी दवाएं नहीं ले रहे बल्कि छोटी-मोटी बीमारियां घरेलू उपायों से या अपने आप ठीक होने का इंतज़ार कर रहे हैं.फोर्टिस अस्पताल में न्यूरोलॉजी के डायरेक्टर एवं हेड डॉक्टर प्रवीण गुप्ता बताते हैं कि इस दौरान ये भी देखने को मिल रहा है कि लोग कम बीमार पड़ रहे हैं. इसकी वजह है साफ़-सफ़ाई का ज़्यादा ध्यान रखना. वह कहते हैं, “पश्चिमी देशों में संक्रामक रोग बहुत कम होते हैं. उसकी सबसे बड़ी वजह है साफ़-सफ़ाई. अब भारत में भी लोग कोरोना वायरस के कारण स्वच्छता का ज़्यादा ध्यान रख रहे हैं. जिसके कारण उन्हें इंफेक्शन कम हो रहा है. गंदे हाथों से खाना खाने से ये इंफेक्शन शरीर में पहुंच जाता है लेकिन कोविड19 के चलते लोग बार-बार हाथ धो रहे हैं या सेनिटाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में हम ना सिर्फ़ कोरोना वायरस को रोक रहे हैं बल्कि दूसरी बीमारियों को भी रोक रहे हैं.” डॉक्टर प्रवीण लोगों के कम बीमारी होने के पीछे कुछ और कारण भी बताते हैं- - लोग अभी बाहर नहीं जा रहे हैं. इसके चलते वो दूसरों के संपर्क में कम आ रहे हैं. ऐसे में ड्रॉपलेट्स के ज़रिए होने वाले इंफेक्शन जैसे ज़ुकाम, वायरल फीवर और फ्लू आदि से लोग बच हुए हैं. - पिछले करीब दो महीनों से हम घर का खाना खा रहे हैं. बाहर का या सड़क किनारे मिलने वाला खाना भी हममें इंफेक्शन का कारण बनता है. ज़्यादा तला-भुना, मसालेदार खाने से दूसरी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी हो सकती हैं. - आजकल लोग अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने की कोशिश भी कर रहे हैं. कोविड19 से सुरक्षा के लिए इम्यूनिटी बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है इसलिए लोग अपने खान-पान में सुधार करके इसका प्रयास कर रहे हैं. इससे भी बीमारियां कम पकड़ रही हैं. - लॉकडाउन के कारण देश में वायु प्रदूषण कम हुआ है. प्रदूषण के कारण ज़ुकाम, खांसी, गले में खराबी जैसी बीमारियां सामान्य थीं. इससे सांस लेने में भी दिक्कत होती है. प्रदूषण कम होने से ये इंफेक्शन कम हो गए हैं. - आजकल लोग काम पर नहीं जा रहे और इसलिए खांसी, जुकाम जैसी छोटी बीमारियों को ठीक होने का समय दे पा रहे हैं. काम पर जाना हो तो तुरंत दवाई खाकर खुद को ठीक करना होता है लेकिन अब वो ऐसा नहीं कर रहे हैं. डॉक्टर कहते हैं कि लोगों के लाइफ़स्टाइल में आया ये बदलाव एक सकारात्मक संकेत भी है. अगर वो साफ-सफाई, स्वच्छ खाने को अपनी आदत बना लेते हैं तो कई बीमारियों से निजात मिल जाएगी.
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