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कवि भरत व्यास की कविता
योग दिवस के अवसर पर अभिनेता और कवि श्री भरत व्यास के द्वारा रचित है-

"योग-साधना-गीत"

योग से जीवन हमारा, योग प्राणाधार है ।

योग ही की साधना से, सुन्दर सुखद संसार है ।।1।।

नव सृजन की साधना का, दीप सब मिलकर जलाएँ ।

ॐ सृष्टि स्वर मिलाकर, योग-साधना-गीत गाएँ ।। 2।।

योग जीवन धारा बदले, सभी रोगों का निस्तार है ।

प्रवृति बदले योग से ही, यही प्रकृति का उपकार है ।।3।।

योग शिष्टाचार का, अनुपम बना उपहार हो ।

संस्कृति-संवर्धन का, बस योग से उध्दार हो ।।4।।

आसन-प्राणायाम हैं निराले, इनसे सभी जीवन सँवारें ।

आओ सभी मिल एक स्वर में, योग-साधना-गीत गाएँ ।।5।।

भरत, गढ़चित्तौड़ धारे, इष्ट का दर्शन कराएँ ।

योग है आरोग्य सेतु, योग-साधना-गीत गाएँ ।।6।।

भरत व्यास, गढ़चित्तौड़ चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)से 7597902211, 9079801191

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