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हिंदुस्तान सभी चुनोतियो से निपटने में सक्षम
चीन,पाकिस्तान और नेपाल के साथ सीमा विवाद और बांग्लादेश की तल्खी के बीच हिंदुस्तान बना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य, देश भर में चर्चा , प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आभार जताया

(अनिल सक्सेना/बेबाक ललकार)

हिंदुस्तान में पाकिस्तान और चीन के साथ दुश्मनी के चर्चे होते रहे है लेकिन अब इन दोनो देशों में नेपाल भी जुड़ गया। इन तीनों देशों से चल रहे सीमा विवाद और सीएए और एनआरसी के कारण बांग्लादेश की तल्खी के बीच बुधवार को हुए सुरक्षा परिषद के चुनाव में हिंदुस्तान के अलावा आयरलैंड, मेक्सिको और नार्वे ने भी जीत हासिल की है। सात बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका हिंदुस्तान इससे पहले 2011-2012 में अस्थायी सदस्य था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिंदुस्तान को सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता को समर्थन देने के लिए अंतरराष्ट्रीय आभार जताते हुए कहा कि भारत सभी देशों के साथ मिलकर शांति, सुरक्षा और समता को बढावा देने के लिए काम करेगा ।

हिंदुस्तान से सीमा विवाद का ताजा मामला चीन का है जहां चीन का आरोप है कि हिंदुस्तान अक्साई चीन स्थित गलवान घाटी में रक्षा संबंधी गैर कानूनी निर्माण कर रहा है। सोमवार रात को दोनो देशों के बीच हुए संघर्ष में हिंदुस्तान के 20 जवान शहीद हुए । इसमें कोई दो राय नही है कि इस संघर्ष में चीन को भी नुकसान हुआ लेकिन चीन ने इस बारें में कोइ आधिकारिक बयान नही दिया है।

दुसरी ओर हिंदुस्तान की ओर से नेपाल सीमा के पास संड़क निर्माण के काम करने के कारण तनाव बढ़ा है। यहां कालापानी , लिंपियाधुरा और लिपुलेख को लेकर विवाद हो रहा है। नेपाल का कहना है कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद हिंदुस्तान की ओर से जारी नक्शे में विवादित जगहों को हिंदुस्तान का हिस्सा दिखाया गया है। इसके बाद नेपाल ने इन तीनों इलाकों को अपने हिस्से में दिखाते हुए देश का नया नक्शा प्रकाशित किया ।

इधर हिंदुस्तान और पाकिस्तान में कश्मीर को लेकर हमेशा तनाव बना रहता है। पिछले साल अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद दोनो देशों के रिश्तें और बिगड़े है। गिलगित-बलतिस्तान में चुनाव कराने को लेकर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हिंदुस्तान ने इस पर आपत्ति जताई थी । पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर हिंदुस्तान का अंग माना जाता है तो इसी प्रकार पाकिस्तान संपूर्ण कश्मीर को अपना बताने का दुस्साहस कर रहा है।

बांग्लादेश के विदेश मंत्री अब्दुल मोमिन और गृह मंत्री असद उज्जमान ने भी सीएए और एनआरसी के मसले पर हिंदुस्तान का अपना दौरा रद्व कर दिया था ।

इसमें कोई दो राय नही है कि मेरे पहले के लेख के अनुसार हिंदुस्तान जिन क्षेत्रों को अपना बताता था उस पर अब अपना हक जताने लगा है, प्रमाणित ही हुआ है।

हिंदुस्तानियों को विश्वास है कि सरकार इन सब चुनौतियों से निपट लेगी । विपक्ष ने भी इन मामलों में सरकार का साथ देने की बात कही है।

अब देखना यह है कि हिंदुस्तान के आवाम के विश्वास पर खरा उतरकर सरकार इन चुनौतियों से किस प्रकार निपटने का कार्य करती है ।

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